Friday, August 29, 2025
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E Mandi MP: कृषि विपणन में एक अभिनव डिजिटल क्रांति

E Mandi MP: भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का एक केंद्रीय स्थान है, और हमारे किसानों को सशक्त बनाना देश के समग्र विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में, भारत सरकार ने ई-नाम (e-NAM) पहल की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य कृषि विपणन के पारंपरिक तरीकों में क्रांति लाना है। मध्य प्रदेश में, ‘E Mandi MP’ इसी राष्ट्रीय पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे विशेष रूप से राज्य के किसानों को सशक्त बनाने और कृषि उपज के विपणन को डिजिटल बनाने के लिए तैयार किया गया है।

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ई-नाम (e-NAM) का संक्षिप्त परिचय और मध्य प्रदेश में इसका संदर्भ

ई-नाम, यानी नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट, को भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा 14 अप्रैल 2016 को लॉन्च किया गया था । यह एक राष्ट्रव्यापी इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है जिसका मुख्य लक्ष्य देश भर की मौजूदा कृषि उपज मंडी समितियों (APMCs) को एक साथ जोड़कर एक एकीकृत राष्ट्रीय कृषि बाजार बनाना है । यह मंच किसानों, व्यापारियों और खरीदारों को कृषि वस्तुओं का ऑनलाइन व्यापार करने की सुविधा देता है, जिससे बाजार में बेहतर मूल्य निर्धारण होता है और कृषि उपज का विपणन सुचारू रूप से होता है

वर्तमान में, ई-नाम प्लेटफॉर्म पर 90 से अधिक कृषि वस्तुएं सूचीबद्ध हैं, जिनमें प्रमुख खाद्यान्न, सब्जियां और फल शामिल हैं । यह बाजार अपनी कार्यकुशलता के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि फसलें तुरंत तौली जाती हैं, स्टॉक उसी दिन उठाया जाता है, और भुगतान ऑनलाइन किए जाते हैं । फिलहाल, व्यापार मुख्य रूप से अंतर-मंडी स्तर पर होता है, लेकिन इसे चरणों में अंतर-राज्य व्यापार के लिए भी लागू किया जाएगा, जिससे कृषि वस्तुओं के लिए एक सच्चा एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनेगा । मध्य प्रदेश में E Mandi MP इसी राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य राज्य के भीतर और अंततः पूरे देश में किसानों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करना है।  

पारंपरिक मंडियों की चुनौतियाँ और ई-मंडी की आवश्यकता

पारंपरिक कृषि मंडियों में किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था, जो उनकी आय और कृषि उत्पादकता पर सीधा नकारात्मक प्रभाव डालती थीं। इन मंडियों में अक्सर पारदर्शिता की कमी होती थी, जिससे बिचौलियों (कमीशन एजेंटों) द्वारा किसानों के शोषण की संभावना बढ़ जाती थी। ये बिचौलिए अक्सर कीमतों को अपने पक्ष में प्रभावित करते थे, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था ।  

किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए परिवहन, बाजार शुल्क और बिचौलियों को कमीशन के रूप में महत्वपूर्ण लागतें भी वहन करनी पड़ती थीं, जिससे उनकी शुद्ध आय कम हो जाती थी । इसके अतिरिक्त, लेनदेन प्रक्रियाएं अत्यधिक समय लेने वाली होती थीं, जिसमें किसानों को लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं, मंडियों में घंटों इंतजार करना पड़ता था, और जटिल बातचीत में शामिल होना पड़ता था ।  

एक और महत्वपूर्ण बाधा ‘लाइसेंस राज’ थी। अधिकांश मंडियों में, लाइसेंस प्राप्त करने की पूर्व-शर्त यह थी कि व्यापारी के पास मंडी में एक दुकान या गोदाम का भौतिक कब्जा होना चाहिए । इस आवश्यकता ने नए व्यापारियों के लिए बाजार में प्रवेश करना मुश्किल बना दिया, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई और मौजूदा लाइसेंसधारकों, विशेषकर कमीशन एजेंटों के बीच एकाधिकार को बढ़ावा मिला। इन एजेंटों द्वारा अक्सर विक्रेता (किसान) और खरीदार दोनों से कमीशन लिया जाता था, जिसे ‘दोहरा कमीशन’ कहा जाता था, जिससे अंतिम उपभोक्ता को भी अधिक भुगतान करना पड़ता था । इस तरह की संरचनात्मक अक्षमताएं किसानों को उनकी उपज के लिए कम मूल्य प्राप्त करने और बाजार की अक्षमताओं का सामना करने के लिए मजबूर करती थीं।  

E Mandi MP का उदय इन अंतर्निहित समस्याओं का सीधा समाधान प्रदान करता है। यह डिजिटल पारदर्शिता और प्रत्यक्ष पहुंच प्रदान करके इन चुनौतियों का सामना करने का प्रयास करता है। यह संक्रमण केवल एक तकनीकी उन्नयन नहीं है, बल्कि कृषि विपणन पारिस्थितिकी तंत्र का एक मौलिक सुधार है। इसका लक्ष्य शक्ति संतुलन को बिचौलियों से हटाकर किसानों की ओर वापस लाना है। जब किसान ई-मंडियों का उपयोग करके औसतन 15-20% अधिक मूल्य प्राप्त करते हैं और लेनदेन लागत में 25% तक की कमी करते हैं , तो उनकी शुद्ध आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। यह केवल एक लेनदेन में बेहतर मूल्य के बारे में नहीं है; यह आर्थिक संतुलन को बदलने के बारे में है। ऐतिहासिक रूप से, बिचौलिए लाभ का एक बड़ा हिस्सा हड़प लेते थे । उनकी भूमिका को कम करके, अधिक धन किसानों के पास रहता है, जिससे जीवन स्तर में सुधार, बेहतर कृषि पद्धतियों में निवेश और ग्रामीण प्रवासन में कमी आ सकती है । यह ग्रामीण आर्थिक विकास के लिए एक सकारात्मक प्रतिक्रिया लूप बनाता है।  

II. ई-मंडी के प्रमुख उद्देश्य और लक्ष्य

ई-मंडी मध्य प्रदेश का उद्देश्य कृषि विपणन प्रणाली में व्यापक सुधार लाना है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अधिकतम लाभ मिल सके। इसके कई प्रमुख उद्देश्य हैं जो एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति

ई-मंडी का एक प्राथमिक उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित और प्रतिस्पर्धी मूल्य सुनिश्चित करना है। यह बिचौलियों की अनावश्यक भूमिका को समाप्त करके प्राप्त किया जाता है, जिससे किसान सीधे बाजार से जुड़ पाते हैं । यह मंच वास्तविक समय में बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर मूल्य खोज को सक्षम बनाता है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ई-मंडियों का उपयोग करने वाले किसानों को पारंपरिक मंडियों की तुलना में औसतन 15-20% अधिक मूल्य प्राप्त हुआ । यह बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता का सीधा परिणाम है, जिससे किसानों को अपनी उपज का सबसे अच्छा मूल्य मिल पाता है । ई-नाम प्लेटफॉर्म पर वर्तमान में 176 कृषि उत्पादों का व्यापार होता है , जिससे किसानों को अपनी उपज के लिए एक व्यापक और विविध बाजार मिलता है।  

बिचौलियों की भूमिका कम करना

ई-मंडी प्रणाली बिचौलियों की समस्या का समाधान करती है, जिससे किसान सीधे थोक खरीदारों, खुदरा विक्रेताओं और यहां तक कि निर्यातकों से भी जुड़ सकते हैं । यह किसानों को बिना किसी दलाल या बिचौलिए के हस्तक्षेप के सीधे अपने उत्पाद बेचने में सक्षम बनाता है, जिससे उन्हें अपने निवेश पर प्रतिस्पर्धी और अधिकतम रिटर्न मिलता है । बिचौलियों की भूमिका को कम करने या समाप्त करने का यह प्रयास एक मुख्य उद्देश्य है, जो किसानों को व्यापारियों द्वारा बनाए गए स्थानीय कार्टेल से मुक्ति दिलाता है और उनका शोषण रोकता है ।  

पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना

E Mandi MP योजना के तहत मंडी में प्रवेश, नीलामी, तौल और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा । किसानों को अपनी उपज की बिक्री से संबंधित वास्तविक समय की जानकारी उनके मोबाइल पर एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित होगी । यह प्रणाली लेनदेन की लागत को 25% तक कम कर सकती है, जिससे किसानों को अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बनाए रखने में मदद मिलती है । भारतीय कृषि अर्थशास्त्र जर्नल ने बताया कि ई-मंडियों का उपयोग करने वाले किसानों ने प्रति लेनदेन औसतन 5-6 घंटे बचाए, जिससे वे अपने मुख्य कृषि कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकें और समग्र उत्पादकता बढ़ा सकें ।  

राज्यव्यापी एकीकृत बाजार का निर्माण

ई-नाम का दीर्घकालिक लक्ष्य एक राष्ट्रीय ई-बाजार मंच बनाना है, जो अंततः अंतर-मंडी और अंतर-राज्य व्यापार को सक्षम करेगा, जिससे कृषि वस्तुओं के लिए एक सच्चा एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनेगा । इस पहल में शामिल होने के इच्छुक राज्यों को अपने APMC अधिनियम में उपयुक्त प्रावधानों को लागू करना आवश्यक है, जैसे कि राज्य भर में एकल व्यापार लाइसेंस की वैधता और एकल बिंदु बाजार शुल्क का प्रावधान । यह व्यापक दृष्टि कृषि बाजार के एक मौलिक नीतिगत बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है, जो एक स्थानीयकृत, खंडित कृषि बाजार से एक अधिक एकीकृत, प्रौद्योगिकी-संचालित राष्ट्रीय बाजार की ओर बढ़ रही है। यह कृषि आधुनिकीकरण और आर्थिक विकास के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टि को इंगित करता है, साथ ही पारंपरिक APMC-केंद्रित मॉडल से अधिक उदार बाजार संरचना की ओर भी बढ़ रहा है।  

“बेहतर मूल्य प्राप्ति” का लक्ष्य सीधे तौर पर “लेनदेन लागत में कमी” और “सीधी बाजार पहुंच” द्वारा सक्षम होता है, जो सभी “बढ़ी हुई पारदर्शिता और दक्षता” और “बिचौलियों के उन्मूलन” द्वारा सुगम होते हैं। ये अलग-थलग उद्देश्य नहीं हैं, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक सहक्रियात्मक पारिस्थितिकी तंत्र है। यदि किसानों को सीधी बाजार पहुंच मिलती है , तो वे बिचौलियों को बायपास करते हैं जो आमतौर पर एक कटौती लेते हैं । इससे उनकी लेनदेन लागत सीधे कम हो जाती है और उपभोक्ता के रुपये में उनका हिस्सा बढ़ जाता है । ऑनलाइन बोली की पारदर्शिता प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करती है, जिससे बेहतर मूल्य खोज होती है । इस प्रकार, ये उद्देश्य गहराई से जुड़े हुए हैं, प्रत्येक किसान के समग्र आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान दे रहा है।  

राज्यों के लिए “एकल व्यापार लाइसेंस” और “एकल बिंदु बाजार शुल्क” लागू करने की आवश्यकता APMC नियमों में एक मौलिक बदलाव का संकेत देती है। यह केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को डिजिटाइज़ करने के बारे में नहीं है, बल्कि भौगोलिक और नियामक बाधाओं को खत्म करने के बारे में है जिन्होंने बाजारों को खंडित किया है । एक एकीकृत बाजार अंतर-राज्य व्यापार की अनुमति देता है, खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है और किसानों को व्यापक पहुंच प्रदान करता है । यह व्यापक निहितार्थ यह है कि सरकार ऐतिहासिक बाजार अक्षमताओं को दूर करने और वास्तव में एक राष्ट्रीय कृषि अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है।  

III. ई-मंडी मध्य प्रदेश की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली

E Mandi MP मध्य प्रदेश एक अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली है जिसे कृषि उपज के व्यापार को सुव्यवस्थित करने और उसमें पारदर्शिता लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली मोबाइल ऐप और कंप्यूटरीकृत प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्य करती है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए लेनदेन आसान और अधिक कुशल हो जाते हैं।

मोबाइल ऐप की भूमिका (प्रवेश पर्ची, नीलामी की जानकारी)

मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड ने एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया है, जो E Mandi MP प्रणाली के केंद्र में है। यह ऐप किसानों को मंडी आने से पहले अपने मोबाइल का उपयोग करके प्रवेश पर्ची बनाने की सुविधा देता है । यह सुविधा किसानों को प्रवेश पर्ची के लिए लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता को समाप्त करती है, जिससे उनके समय की बचत होती है और मंडी में भीड़ कम होती है । एक बार प्रवेश पर्ची बन जाने पर, किसानों को बार-बार अपना पूरा डेटा मंडी में देने की आवश्यकता नहीं होती है, और वे सीधे नीलामी स्थलों पर जाकर अपनी कृषि उपज की नीलामी करा सकते हैं ।  

इसके अतिरिक्त, किसान अपनी उपज की नीलामी की कार्यवाही और संबंधित जानकारी सीधे अपने मोबाइल फोन पर प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें वास्तविक समय में अपडेट मिलेंगे । ऐप में क्यूआर कोड आधारित प्रवेश की सुविधा भी है, जिससे किसान प्रवेश द्वार पर क्यूआर कोड दिखाकर अपनी प्रवेश पर्ची का प्रिंट आसानी से प्राप्त कर सकते हैं । यह ऐप विभिन्न हितधारकों जैसे प्रवेश द्वार ऑपरेटर, नीलामीकर्ता, तुलैया (वजन करने वाले), मंडी सचिव और व्यापारियों के लिए भूमिका-आधारित लॉगिन भी प्रदान करता है ।  

डिजिटल प्रक्रियाएँ: नीलामी, तौल और भुगतान

E Mandi MP योजना के तहत, मंडी परिसर में प्रवेश से लेकर नीलामी, तौल और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और डिजिटल रहेगी । यह मैन्युअल हस्तक्षेप को कम करता है और त्रुटियों की संभावना को समाप्त करता है।  

तुलावटी (वजन करने वाले कर्मचारी) को E Mandi MP योजना का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है । वे अब एंड्रॉयड मोबाइल उपकरणों पर अंतिम वजन दर्ज करेंगे, जिससे मैन्युअल रूप से लिखने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और सटीकता बढ़ेगी । इसी तरह, व्यापारियों को अब भुगतान पत्रक मैन्युअल रूप से बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। ई-मंडी प्रणाली में उनकी आईडी पर एक रेडीमेड भुगतान पत्रक प्रदर्शित होगा, जिसमें उन्हें केवल किसानों को किए गए भुगतान की राशि दर्ज करनी होगी । सफल लेनदेन के बाद, किसानों को उनके मोबाइल नंबर पर एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से भुगतान संख्या और उनके भुगतान का विवरण प्राप्त होगा, जिससे प्रक्रिया में उच्चतम स्तर की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी ।  

मैन्युअल प्रक्रियाओं (प्रवेश पर्ची के लिए कतार में लगना, मैन्युअल तौल रिकॉर्ड, भौतिक भुगतान पर्ची) से डिजिटल उपकरणों (मोबाइल ऐप एंट्री, एंड्रॉइड-आधारित तौल, स्वचालित भुगतान पर्ची) में बदलाव से किसानों और अन्य हितधारकों के लिए समय की महत्वपूर्ण बचत और असुविधा में कमी आती है। यह एक स्पष्ट दक्षता लाभ है, जैसा कि एक अध्ययन में बताया गया है कि किसान प्रति लेनदेन औसतन 5-6 घंटे बचाते हैं ।  

रियल-टाइम रिकॉर्ड और पारदर्शिता

E Mandi MP योजना से किसानों द्वारा मंडी में बेची गई कृषि उपज का रियल-टाइम ऑनलाइन रिकॉर्ड संधारण होगा । यह सुनिश्चित करेगा कि सभी लेनदेन का एक सटीक और अद्यतन डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हो, जिसे किसी भी समय एक्सेस किया जा सके। किसानों को यह भी पता चलेगा कि उनकी उपज किस व्यापारी ने कितने दाम पर खरीदी है, जिससे उन्हें अपनी उपज के मूल्य निर्धारण में पूरी जानकारी और नियंत्रण मिलेगा ।  

पारंपरिक मंडियों में, मैन्युअल रिकॉर्ड और तत्काल जानकारी की कमी अक्सर विवादों या शोषण का कारण बनती थी । प्रत्येक चरण को डिजिटाइज़ करके और सीधे किसान के मोबाइल पर वास्तविक समय अपडेट प्रदान करके , यह प्रणाली किसी भी पक्ष (व्यापारी, कमीशन एजेंट, या यहां तक कि मंडी कर्मचारी) के लिए कीमतों, वजन या भुगतानों में हेरफेर करना मुश्किल बना देती है। यह विश्वास बनाता है और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करता है, बाजार में शक्ति गतिशीलता को मौलिक रूप से बदलता है।  

एकल लाइसेंस प्रणाली

ई-नाम में शामिल होने की एक प्रमुख शर्त यह है कि राज्यों को अपने APMC अधिनियम में एकल व्यापार लाइसेंस का प्रावधान करना होगा, जो पूरे राज्य में वैध होगा । यह व्यापारियों को एक ही लाइसेंस के साथ राज्य की सभी मंडियों में व्यापार करने की अनुमति देता है, जिससे व्यापार में आसानी होती है और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है । यह प्रणाली व्यापारियों को एक राज्य के भीतर किसी भी प्रमुख बाजार या उप-बाजार में काम करने की स्वतंत्रता देती है, जिससे उन्हें व्यापक बाजार तक पहुंच मिलती है।  

तालिका: ई-मंडी ऐप की प्रमुख विशेषताएं

E Mandi MP ऐप किसानों और अन्य हितधारकों के लिए कृषि विपणन को सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण विशेषताएं प्रदान करता है:

विशेषता (Feature)विवरण (Description)
प्रवेश पर्ची निर्माण (Entry Pass Generation)किसान घर बैठे मोबाइल से अपनी प्रवेश पर्ची बना सकते हैं और सीधे नीलामी में भाग ले सकते हैं।  
क्यूआर कोड आधारित प्रवेश (QR Code Based Entry)मंडी गेट पर क्यूआर कोड दिखाकर प्रवेश पर्ची का प्रिंट प्राप्त कर सकते हैं।  
भूमिका-आधारित लॉगिन (Role-Based Logins)किसान, प्रवेश द्वार ऑपरेटर, नीलामीकर्ता, तुलैया, मंडी सचिव और व्यापारी के लिए अलग-अलग लॉगिन।  
व्यापारी भुगतान पत्रक (Trader Payment Letter)व्यापारी मुफ्त में भुगतान पत्रक बना सकते हैं; किसानों को मोबाइल पर भुगतान विवरण प्राप्त होता है।  
2-कारक प्रमाणीकरण (2-Factor Authentication)व्यापारियों और तुलैया के लिए बायोमेट्रिक और MPIN/eAnguya PIN के साथ सुरक्षित लॉगिन।  
रियल-टाइम रिकॉर्ड (Real-time Records)उपज की बिक्री का ऑनलाइन रिकॉर्ड संधारण और एसएमएस/व्हाट्सएप अपडेट।  
इंटरनेट चेकर और सर्च विकल्प (Internet Checker & Search)ऐप में इंटरनेट कनेक्टिविटी जांच और रिपोर्ट में खोज की सुविधा।  

IV. किसानों और व्यापारियों के लिए ई-मंडी के लाभ

ई-मंडी प्रणाली किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए कृषि विपणन में कई महत्वपूर्ण लाभ लाती है, जिससे यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में एक अधिक कुशल और लाभदायक विकल्प बन जाती है।

बढ़ी हुई पारदर्शिता और उचित मूल्य निर्धारण

ई-मंडियां डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाती हैं ताकि वर्तमान बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर वास्तविक समय मूल्य निर्धारण प्रदान किया जा सके, जिससे किसानों को उनकी उपज का सबसे अच्छा मूल्य मिल सके । नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ई-मंडियों का उपयोग करने वाले किसानों को पारंपरिक मंडियों की तुलना में औसतन 15-20% अधिक मूल्य प्राप्त हुआ । यह बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता का सीधा परिणाम है, बिचौलियों की भूमिका को प्रभावी ढंग से समाप्त करती है जो आमतौर पर कीमतों को कम करते हैं । यह किसानों को उनकी उपज के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में मदद करता है।  

सीधी बाजार पहुँच और विस्तारित बाजार

ई-मंडियां किसानों को थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और अंतिम उपभोक्ताओं सहित खरीदारों के व्यापक स्पेक्ट्रम तक सीधी पहुँच प्रदान करती हैं, जिससे उन्हें अपनी उपज के लिए अधिक विकल्प मिलते हैं । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के एक अध्ययन में पाया गया कि ई-मंडियों का उपयोग करने वाले किसान 300 किलोमीटर तक के बाजारों तक पहुँच सकते थे, जबकि पारंपरिक मंडियों के लिए यह अधिकतम 50 किलोमीटर था । यह विस्तारित बाजार पहुँच बेहतर मूल्य खोज की सुविधा प्रदान करती है और स्थानीय खरीदारों पर निर्भरता कम करती है, जो सीमित प्रतिस्पर्धा के कारण कम कीमतें दे सकते हैं । यह पहुंच किसानों को स्थानीय बाजार की सीमाओं से मुक्त करती है, जिससे उन्हें अपनी उपज के लिए सबसे अच्छा खरीदार खोजने की स्वतंत्रता मिलती है।  

लेन-देन लागत में कमी और समय की बचत

पारंपरिक मंडियों में, किसानों को परिवहन, बाजार शुल्क और बिचौलियों को कमीशन से संबंधित महत्वपूर्ण लागतें आती हैं, जो उनकी आय को कम करती हैं । खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, ई-मंडियां लेनदेन लागत को 25% तक कम कर सकती हैं, जिससे किसानों को अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बनाए रखने में मदद मिलती । भारतीय कृषि अर्थशास्त्र जर्नल ने बताया कि ई-मंडियों का उपयोग करने वाले किसानों ने प्रति लेनदेन औसतन 5-6 घंटे बचाए, जिससे वे अपने मुख्य कृषि कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकें और समग्र उत्पादकता बढ़ा सकें । यह कमी किसानों की लाभप्रदता को सीधे बढ़ाती है।  

बाजार जानकारी और विश्लेषण तक पहुँच

ई-मंडियां किसानों को मूल्य रुझान, मांग पूर्वानुमान और खरीदार व्यवहार विश्लेषण सहित मूल्यवान बाजार डेटा तक पहुँच प्रदान करती हैं। यह जानकारी उन्हें सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है । अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, ई-मंडियों का उपयोग करने वाले 80% किसानों ने बाजार जानकारी तक पहुँच के कारण बेहतर निर्णय लेने की सूचना दी, जबकि पारंपरिक मंडियों में केवल 45% किसानों ने ऐसा किया । यह जानकारी किसानों को फसल चयन, कटाई के समय और मूल्य निर्धारण रणनीतियों के बारे में सूचित और रणनीतिक निर्णय लेने में सशक्त बनाती है, जिससे वे बाजार की बदलती परिस्थितियों के प्रति अधिक उत्तरदायी बन सकें।  

गुणवत्ता नियंत्रण और पता लगाने की क्षमता में सुधार

ई-मंडियां अक्सर उपज की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए कठोर गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र और पता लगाने की क्षमता प्रणालियों को शामिल करती हैं । विश्व बैंक का अनुमान है कि ई-मंडियों में पता लगाने की क्षमता प्रणालियाँ कटाई के बाद के नुकसान को 10-15% तक कम कर सकती हैं, जिससे उपज की समग्र गुणवत्ता और मूल्य में वृद्धि होती है । यह स्तर का निरीक्षण उच्च मानकों को बनाए रखने में मदद करता है और खरीदारों के साथ विश्वास बनाता है, जो पारंपरिक मंडियों में लगातार प्राप्त करना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।  

उच्च कीमतों, कम लागत और बाजार की जानकारी तक पहुंच का संयोजन सीधे किसानों के लिए बढ़ी हुई लाभप्रदता और वित्तीय स्थिरता में बदल जाता है । यह मूल्य अस्थिरता और सीमित स्थानीय खरीदारों से जुड़े जोखिमों को भी कम करता है, जिससे खेती एक अधिक व्यवहार्य और अनुमानित आजीविका बन जाती है। जब किसानों को 15-20% अधिक मूल्य प्राप्त होता है और लेनदेन लागत में 25% की बचत होती है , तो उनकी शुद्ध आय में काफी वृद्धि होती है। यह सीधे कम कृषि आय के मुद्दे को संबोधित करता है। इसके अलावा, 300 किमी तक के बाजारों तक पहुंच स्थानीय कार्टेल पर निर्भरता को कम करती है और अधिक विकल्प प्रदान करती है, जिससे कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होने का जोखिम कम होता है। बाजार की जानकारी तक पहुंच सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है, जिससे फसल चयन और समय से संबंधित जोखिमों को और कम किया जा सके। इन संयुक्त प्रभावों से किसानों के लिए अधिक आर्थिक सशक्तिकरण और लचीलापन आता है।  

ई-मंडियां केवल मौजूदा प्रक्रियाओं में सुधार नहीं कर रही हैं, बल्कि एक व्यापक कृषि परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर रही हैं, जो एक अधिक डेटा-संचालित, कुशल और किसान-केंद्रित कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही हैं। इससे कृषि में निवेश में वृद्धि और एक अधिक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला हो सकती है। उल्लिखित लाभ (पारदर्शिता, बाजार पहुंच, लागत में कमी, जानकारी तक पहुंच, गुणवत्ता नियंत्रण) सामूहिक रूप से एक प्रणालीगत ओवरहॉल की ओर इशारा करते हैं। जब किसानों को जानकारी और बेहतर रिटर्न के साथ सशक्त किया जाता है, तो वे आधुनिक कृषि पद्धतियों में निवेश करने, नई तकनीकों को अपनाने और फसलों में विविधता लाने की अधिक संभावना रखते हैं। यह एक अधिक गतिशील और उत्तरदायी कृषि क्षेत्र बनाता है, जो अधिक प्रतिभागियों (व्यापारी, प्रोसेसर, निर्यातक) को आकर्षित करता है और संभावित रूप से पूरे राष्ट्र के लिए एक अधिक मजबूत और लचीली खाद्य आपूर्ति श्रृंखला की ओर ले जाता है।  

तालिका: ई-मंडी बनाम पारंपरिक मंडी: तुलनात्मक लाभ

E Mandi MP प्रणाली पारंपरिक मंडियों की तुलना में कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है, जैसा कि निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है:

पहलू (Aspect)पारंपरिक मंडी (Traditional Mandi)E Mandi MP (e-Mandi)संदर्भ (Reference)
मूल्य निर्धारण (Pricing)बिचौलियों द्वारा प्रभावित, पारदर्शिता की कमी, कम मूल्यवास्तविक समय, प्रतिस्पर्धी, 15-20% अधिक मूल्य  
बाजार पहुँच (Market Access)सीमित, अधिकतम 50 किमीव्यापक, 300 किमी तक  
लेन-देन लागत (Transaction Costs)उच्च (परिवहन, शुल्क, कमीशन)25% तक कम  
समय दक्षता (Time Efficiency)समय लेने वाली (यात्रा, प्रतीक्षा, बातचीत)प्रति लेन-देन 5-6 घंटे की बचत  
बाजार जानकारी (Market Information)सीमित या अनुपलब्धमूल्य रुझान, मांग पूर्वानुमान, खरीदार व्यवहार विश्लेषण तक पहुँच  
गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control)अक्सर अनौपचारिक, कम पता लगाने की क्षमताकठोर तंत्र, 10-15% कटाई के बाद के नुकसान में कमी  

V. मध्य प्रदेश में ई-मंडी का विस्तार और वर्तमान स्थिति

मध्य प्रदेश में E Mandi MP योजना राज्य के कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन ला रही है। यह योजना न केवल किसानों को आधुनिक विपणन उपकरण प्रदान कर रही है, बल्कि राज्य के कृषि विपणन बोर्ड की महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं के माध्यम से इसका दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।

वर्तमान में क्रियाशील मंडियों की संख्या

मध्य प्रदेश में E Mandi MP योजना पहले से ही 42 मंडियों में सफलतापूर्वक क्रियाशील है । इन मंडियों में किसानों और व्यापारियों को डिजिटल व्यापार का लाभ मिल रहा है, जिससे उन्हें अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य और अधिक कुशल लेनदेन का अनुभव हो रहा है। इन मंडियों में प्राप्त अनुभव बताते हैं कि यह प्रक्रिया किसानों के लिए सुविधाजनक रही है ।  

भविष्य के लक्ष्य: 1 अप्रैल 2025 तक सभी 259 मंडियों को ई-मंडी बनाना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है कि 1 अप्रैल 2025 तक राज्य की सभी 259 कृषि मंडियां पूरी तरह से E Mandi MP के रूप में कार्य करना शुरू कर देंगी । यह लक्ष्य राज्य सरकार की डिजिटल कृषि विपणन के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता और इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की इच्छा को दर्शाता है। यह एक तीव्र विस्तार योजना है जो राज्य में कृषि बाजारों को पूरी तरह से डिजिटाइज़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।  

कम समय सीमा (अप्रैल 2025 तक) में 42 से 259 मंडियों तक का तीव्र विस्तार मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि बाजारों को डिजिटाइज़ करने के लिए एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और आक्रामक कार्यान्वयन रणनीति को प्रदर्शित करता है। यह योजना की सफलता के प्रति उच्च स्तर की प्रतिबद्धता को इंगित करता है। कार्यान्वयन की यह गति E Mandi MP प्रणाली के लाभों में एक मजबूत विश्वास और संभावित बाधाओं को जल्दी दूर करने के लिए एक ठोस प्रयास का सुझाव देती है।

विस्तार में शामिल नई मंडियाँ

इस विस्तार योजना के तहत, 1 जनवरी 2025 से 41 नई बी-श्रेणी की मंडियों में डिजिटल प्रक्रिया शुरू हो रही है । इन मंडियों में डिजिटल प्रक्रियाएं लागू होने से किसानों को पारंपरिक और समय लेने वाली प्रक्रियाओं से मुक्ति मिलेगी ।  

इनमें बेरूसिया, भैरूंडा, ओबेदुल्लागंज, रायसेन, सिरोंज, ब्यावरा, पचोर, नरसिंहगढ़, कुरवर, खिरकिया, नर्मदापुरम, सांवर, महू, मनवर, कुक्षी, धामनोद, सनावद, भीकनगांव, बुरहानपुर, महीदपुर, तराना, पिपलिया, सैलाना, शाजापुर, दतिया, कुंभराज, मुंगावली, कोलारस, श्योपुरकला, बीना, खुरई, हरपालपुर, निवाड़ी, शाहपुरा (भिटोनी), सूसर, गाडरवारा, करेली, नरसिंहपुर, गोटेगांव, सिवनी और नागौद जैसी महत्वपूर्ण मंडियां शामिल हैं । इस विस्तार से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों को E Mandi MP के लाभों तक पहुंच मिलेगी।  

यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य सराहनीय है, लेकिन 2025 तक सभी 259 मंडियों में पूर्ण डिजिटल अपनाने को प्राप्त करने के लिए किसानों के बीच डिजिटल साक्षरता, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और मंडी स्तरों पर पर्याप्त स्टाफिंग/प्रशिक्षण जैसी चुनौतियों को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयासों की आवश्यकता होगी। इस तीव्र विस्तार की सफलता प्रभावी डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे के विकास पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, सीहोर में एक पायलट परियोजना में, कर्मचारियों की कमी और किसानों के बीच स्मार्टफोन के उपयोग के कौशल की कमी के कारण ई-मंडी सुविधा विफल रही थी । जबकि योजना में प्रशिक्षण का उल्लेख है , इसे 259 मंडियों तक बढ़ाना, जिनमें से कई ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित इंटरनेट के साथ हैं , एक बड़ी रसद और शैक्षिक चुनौती प्रस्तुत करता है। सफलता केवल प्रौद्योगिकी लॉन्च करने पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि सभी किसानों के लिए समान पहुंच और उपयोगिता सुनिश्चित करने पर निर्भर करेगी, जिसका अर्थ है मजबूत डिजिटल समावेश कार्यक्रमों की आवश्यकता।  

VI. ई-मंडी पर पंजीकरण प्रक्रिया: किसान और व्यापारी

E Mandi MP प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी हितधारक डिजिटल व्यापार के लाभों का पूरी तरह से उपयोग कर सकें और पारदर्शी लेनदेन में भाग ले सकें।

किसानों के लिए चरण-दर-चरण पंजीकरण गाइड

किसानों के लिए ई-नाम प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया है, जो उन्हें अपनी उपज को ऑनलाइन बेचने के लिए आवश्यक पहुंच प्रदान करती है:

  1. पंजीकरण पृष्ठ तक पहुँच: उपयोगकर्ता ई-नाम वेबसाइट पर पंजीकरण आइकन पर क्लिक करके या सीधे पंजीकरण पृष्ठ पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं ।  
  2. पंजीकरण प्रकार और APMC का चयन: पंजीकरण पृष्ठ पर, “पंजीकरण प्रकार” के रूप में “किसान” चुनें और अपनी वांछित “APMC” (कृषि उपज मंडी समिति) का चयन करें ।  
  3. ईमेल आईडी प्रदान करना: एक सही ईमेल आईडी प्रदान करना अनिवार्य है, क्योंकि लॉगिन आईडी और पासवर्ड सहित सभी महत्वपूर्ण संचार इसी ईमेल पते पर भेजे जाएंगे ।  
  4. अस्थायी क्रेडेंशियल प्राप्त करना: सफल प्रारंभिक पंजीकरण के बाद, एक अस्थायी लॉगिन आईडी और पासवर्ड प्रदान की गई ईमेल पर भेजा जाएगा ।  
  5. प्रारंभिक लॉगिन और डैशबोर्ड पहुँच: सिस्टम के माध्यम से ई-नाम वेबसाइट पर लॉगिन आइकन पर क्लिक करके डैशबोर्ड में लॉगिन करें ।  
  6. केवाईसी पूरा करना और विवरण अपडेट करना: डैशबोर्ड पर लॉगिन करने के बाद, एक चमकता संदेश “APMC के साथ पंजीकरण करने के लिए यहां क्लिक करें” दिखाई देगा। इस लिंक पर क्लिक करने से उपयोगकर्ता को अपने विवरण भरने/अपडेट करने के लिए पंजीकरण पृष्ठ पर रीडायरेक्ट किया जाएगा। केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आवेदन चयनित APMC को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा ।  
  7. स्थायी लॉगिन आईडी प्राप्त करना: APMC द्वारा आवेदन अनुमोदित होने के बाद, उपयोगकर्ता को पंजीकृत ईमेल आईडी पर अपना eNAM किसान स्थायी लॉगिन आईडी (उदाहरण: HR866F00001) और पासवर्ड प्राप्त होगा, जिससे e-NAM प्लेटफॉर्म पर पूर्ण पहुँच मिल जाएगी । किसान सहायता के लिए अपनी संबंधित मंडी/APMC से भी संपर्क कर सकते हैं ।  

व्यापारियों के लिए चरण-दर-चरण पंजीकरण गाइड

व्यापारी भी ई-नाम प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर सकते हैं, जिससे उन्हें राज्य भर में और अंतर-राज्यीय व्यापार में भाग लेने की अनुमति मिलती है:

  1. पंजीकरण पृष्ठ तक पहुँच: उपयोगकर्ता ई-नाम वेबसाइट पर लॉगिन आइकन पर क्लिक करके या सीधे पंजीकरण पृष्ठ पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं ।  
  2. पंजीकरण प्रकार और APMC/राज्य स्तर का चयन: पंजीकरण पृष्ठ पर, “पंजीकरण प्रकार” के रूप में “व्यापारी” चुनें। फिर, उपयुक्त “APMC” या “राज्य स्तर” का चयन करें ।  
  3. फोटो और ईमेल आईडी प्रदान करना: एक पासपोर्ट आकार का फोटो और एक सही ईमेल आईडी प्रदान करें, जिस पर लॉगिन आईडी और पासवर्ड प्राप्त होंगे ।  
  4. अस्थायी क्रेडेंशियल प्राप्त करना: सफल पंजीकरण के बाद, एक अस्थायी लॉगिन आईडी और पासवर्ड प्रदान की गई ईमेल आईडी पर भेजा जाएगा ।  
  5. प्रारंभिक लॉगिन और डैशबोर्ड पहुँच: सिस्टम के माध्यम से ई-नाम वेबसाइट पर लॉगिन आइकन पर क्लिक करके डैशबोर्ड में लॉगिन करें ।  
  6. APMC/SAMB के साथ पंजीकरण और विवरण जमा करना: डैशबोर्ड पर एक चमकता संदेश “APMC के साथ पंजीकरण करने के लिए यहां क्लिक करें” दिखाई देगा। इस लिंक पर क्लिक करने से उपयोगकर्ता को विवरण भरने/अपडेट करने के लिए पंजीकरण पृष्ठ पर रीडायरेक्ट किया जाएगा। विवरण चयनित APMC या SAMB (राज्य कृषि विपणन बोर्ड) को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किए जाएंगे (एक एकीकृत लाइसेंस के मामले में) ।  
  7. लाइसेंस और केवाईसी विवरण जमा करना: एक और चमकता संदेश “लिंक पर क्लिक करें” दिखाई देगा, जो व्यापारियों को पंजीकरण पृष्ठ पर रीडायरेक्ट करेगा ताकि वे अपने लाइसेंस और केवाईसी विवरण जमा कर सकें। ये विवरण चयनित APMC द्वारा अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किए जाएंगे ।  
  8. स्थायी लॉगिन आईडी प्राप्त करना: स्थायी लॉगिन आईडी (उदाहरण: HR866T00001) और पासवर्ड के लिए, व्यापारियों को अपनी संबंधित मंडी/APMC का दौरा करना होगा और अपना लाइसेंस नंबर सत्यापित करना होगा। APMC द्वारा सफल अनुमोदन के बाद, eNAM व्यापारी/कमीशन एजेंट आईडी और पासवर्ड प्रदान की गई ईमेल पर भेजे जाएंगे । व्यापारी/कमीशन एजेंट प्रदान की गई लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके ऑनलाइन व्यापार में भाग ले सकते हैं ।  

आवश्यक दस्तावेज़ और तकनीकी आवश्यकताएँ

पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए, किसानों और व्यापारियों दोनों को कुछ आवश्यक दस्तावेज़ और तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा:

किसानों के लिए:

  • फोटो आईडी प्रकार: आधार, पैन कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, या पासपोर्ट ।  
  • मोबाइल नंबर: पंजीकरण और संचार के लिए एक वैध मोबाइल नंबर ।  
  • बैंक विवरण: IFSC कोड, खाताधारक का नाम, बैंक का नाम, खाता संख्या, शाखा का नाम और शाखा का पता ।  
  • दस्तावेज़ अपलोड: पासबुक/रद्द किए गए चेक की स्कैन की गई कॉपी और आईडी प्रूफ की स्कैन की गई कॉपी ।  
  • तकनीकी आवश्यकताएँ: एक स्मार्टफोन (हालांकि कई किसानों के पास नहीं हैं या उन्हें इसे संचालित करना नहीं आता है ), इंटरनेट कनेक्टिविटी, और बुनियादी डिजिटल साक्षरता।  

व्यापारियों के लिए:

  • पंजीकरण श्रेणी: व्यापारी, कमीशन एजेंट, सहकारी, निर्यातक, प्रोसेसर, सरकारी एजेंसी, खुदरा विक्रेता, एग्रीगेटर, या अन्य ।  
  • फर्म विवरण: कंपनी का नाम, कंपनी पंजीकरण संख्या, IEC नंबर, फर्म पंजीकरण संख्या, लाइसेंस नंबर, APMC/एकीकृत लाइसेंस नंबर, लाइसेंस की वैधता अवधि, और फर्म का पता ।  
  • व्यक्तिगत विवरण: शीर्षक, पहला नाम, मध्य नाम, अंतिम नाम, लिंग, जन्म तिथि, संबंध प्रकार, और पता ।  
  • बैंक विवरण: IFSC कोड, खाताधारक का नाम, बैंक का नाम, खाता संख्या, शाखा का नाम और शाखा का पता ।  
  • दस्तावेज़ अपलोड: पासबुक/रद्द किए गए चेक की स्कैन की गई कॉपी, आईडी प्रूफ की स्कैन की गई कॉपी, कंपनी पंजीकरण प्रमाण पत्र, और लॉजिस्टिक्स विवरण की कॉपी ।  
  • तकनीकी आवश्यकताएँ: इंटरनेट एक्सेस के साथ एक कंप्यूटर या स्मार्टफोन, और डिजिटल लेनदेन को संभालने की क्षमता।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों को स्मार्टफोन के उपयोग और इंटरनेट कनेक्टिविटी से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है । इन चुनौतियों का समाधान योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।  

VII. ई-मंडी के सामने चुनौतियाँ और समाधान

E Mandi MP योजना, अपने व्यापक लाभों के बावजूद, मध्य प्रदेश में अपने पूर्ण कार्यान्वयन और अपनाने में कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करती है। इन चुनौतियों को समझना और उनका समाधान करना योजना की दीर्घकालिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

डिजिटल साक्षरता और जागरूकता का अभाव

सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक किसानों के बीच डिजिटल साक्षरता और जागरूकता का अभाव है। कई किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, और जिनके पास हैं, उनमें से कई को स्मार्टफोन को प्रभावी ढंग से संचालित करना नहीं आता । सीहोर में एक पायलट परियोजना में, यह देखा गया कि किसान नई प्रणाली के आदी होने में समय ले रहे थे, और कई ने ऑनलाइन प्रक्रिया के बजाय ऑफ़लाइन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी ।  

इस समस्या के समाधान के लिए, मंडी बोर्ड ने प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं और किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है । इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को ऐप का उपयोग करने, प्रवेश पर्ची बनाने और डिजिटल लेनदेन को समझने में मदद करना है, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ ई-मंडी प्रणाली का उपयोग कर सकें।  

इंटरनेट कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचा

ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी ई-मंडी के सुचारू संचालन में एक और बड़ी बाधा है । डिजिटल लेनदेन और वास्तविक समय की जानकारी के लिए स्थिर इंटरनेट आवश्यक है। यदि कनेक्टिविटी खराब है, तो किसान और व्यापारी ऐप का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाएंगे, जिससे देरी और निराशा होगी।  

इस चुनौती का सामना करने के लिए, मंडी बोर्ड मंडियों में वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित करने की योजना बना रहा है । यह सुनिश्चित करेगा कि मंडी परिसर के भीतर किसानों और व्यापारियों के पास पर्याप्त इंटरनेट पहुंच हो, भले ही उनके पास अपने घरों में विश्वसनीय कनेक्शन न हो।  

कर्मचारियों की कमी और प्रशिक्षण

मंडी स्तर पर कर्मचारियों की कमी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। सीहोर के कृषि उपज मंडी में, कर्मचारियों की कमी के कारण किसानों की जानकारी और फोन नंबर दर्ज करने में अत्यधिक समय लग रहा था, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया धीमी हो रही थी । कर्मचारियों की अपर्याप्त संख्या के कारण किसानों के नाम और अन्य जानकारी दर्ज करने के लिए काउंटरों की संख्या कम थी, जबकि मंडी में किसानों की संख्या बढ़ रही थी ।  

इस समस्या को दूर करने के लिए, मंडी कर्मचारियों, विशेष रूप से तुलावटी (वजन करने वाले) को E Mandi MP योजना पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है । यह सुनिश्चित करता है कि वे एंड्रॉयड मोबाइल उपकरणों पर वजन दर्ज करने और डिजिटल प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए सुसज्जित हों। पर्याप्त स्टाफिंग और निरंतर प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि डिजिटल प्रणाली सुचारू रूप से कार्य करे और किसानों को आवश्यक सहायता मिले।  

तकनीकी अनुकूलन और उपयोगकर्ता अनुभव

किसी भी नई तकनीक को अपनाने में उपयोगकर्ता अनुभव महत्वपूर्ण होता है। E Mandi MP ऐप को बेहतर प्रदर्शन के लिए एक नया यूआई डिज़ाइन मिला है, और इसमें ऐप शेयर विकल्प, इंटरनेट चेकर, खोज विकल्प, तिथि के अनुसार फ़िल्टर विकल्प और ऐप अपडेट चेकर जैसी नई विशेषताएं शामिल हैं । व्यापारियों और तुलैया के लिए 2-कारक प्रमाणीकरण जैसी सुरक्षा विशेषताएं भी जोड़ी गई हैं ।  

हालांकि, किसानों को अभी भी नई प्रणाली के आदी होने में समय लगता है । यह सुनिश्चित करना कि ऐप अत्यधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बना रहे और किसानों की प्रतिक्रिया के आधार पर लगातार अपडेट होता रहे, व्यापक अपनाने के लिए महत्वपूर्ण है।  

ये चुनौतियाँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं; उदाहरण के लिए, खराब कनेक्टिविटी डिजिटल साक्षरता प्रयासों में बाधा डालती है। इन चुनौतियों पर काबू पाना समान पहुंच सुनिश्चित करने और योजना की पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे एक डिजिटल विभाजन को रोका जा सके। यदि इन मुद्दों का प्रभावी ढंग से समाधान नहीं किया जाता है, तो E Mandi MP के लाभ उन किसानों तक सीमित रह सकते हैं जिनके पास पहले से ही तकनीकी पहुंच और कौशल हैं, जिससे ग्रामीण कृषि समुदाय के एक बड़े हिस्से को पीछे छोड़ दिया जा सकता है। इसलिए, सफलता केवल प्रौद्योगिकी को लागू करने पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि एक मजबूत समर्थन प्रणाली और समावेशी दृष्टिकोण पर भी निर्भर करती है।

VIII. ई-मंडी: सफलता की कहानियाँ और प्रभाव

E Mandi MP योजना ने मध्य प्रदेश में कृषि विपणन में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं, जिससे किसानों और मंडियों दोनों के लिए ठोस लाभ हुए हैं। प्रारंभिक सफलता की कहानियाँ और उपलब्ध डेटा इस डिजिटल क्रांति के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं।

किसानों पर सकारात्मक प्रभाव

E Mandi MP ने किसानों के लिए कई सकारात्मक प्रभाव डाले हैं। सबसे महत्वपूर्ण लाभों में से एक उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति है। बिचौलियों के उन्मूलन और ऑनलाइन बोली के माध्यम से बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा के कारण, किसानों को पारंपरिक मंडियों की तुलना में औसतन 15-20% अधिक मूल्य प्राप्त हुआ है । यह उनके निवेश पर प्रतिस्पर्धी रिटर्न सुनिश्चित करता है और उन्हें बिचौलियों द्वारा शोषण से बचाता है ।  

इसके अतिरिक्त, E Mandi MP ने किसानों के लिए समय की बचत की है और लेनदेन लागत को कम किया है। उन्हें अब प्रवेश पर्ची के लिए लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं है, और नीलामी, तौल और भुगतान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो गई है । एक अध्ययन के अनुसार, ई-मंडियों का उपयोग करने वाले किसानों ने प्रति लेनदेन औसतन 5-6 घंटे बचाए और लेनदेन लागत में 25% तक की कमी देखी । यह समय और लागत बचत किसानों को अपने मुख्य कृषि कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने और अपनी समग्र उत्पादकता बढ़ाने की अनुमति देती है।  

किसानों को अपनी उपज की बिक्री का वास्तविक समय ऑनलाइन रिकॉर्ड भी मिलता है, और उन्हें एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से जानकारी प्राप्त होती है कि उनकी उपज किस व्यापारी ने कितने दाम पर खरीदी है । यह पारदर्शिता उन्हें अपनी उपज के मूल्य निर्धारण में पूरी जानकारी और नियंत्रण प्रदान करती है, जिससे विश्वास और सशक्तिकरण बढ़ता है।  

मंडियों और व्यापार पर प्रभाव

E Mandi MP ने मंडियों के संचालन में भी सुधार किया है। बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता के कारण, मंडियों में व्यापार की मात्रा में वृद्धि हुई है, जिससे मंडियों के लिए बाजार शुल्क में वृद्धि हुई है । व्यापारियों को भी ई-मंडी प्रणाली से लाभ हुआ है, क्योंकि उन्हें अब भुगतान पत्रक मैन्युअल रूप से बनाने की आवश्यकता नहीं है, और पूरी प्रक्रिया कंप्यूटरीकृत हो गई है, जिससे दक्षता बढ़ी है । एकल लाइसेंस प्रणाली भी व्यापारियों को एक ही लाइसेंस के साथ राज्य की सभी मंडियों में व्यापार करने की अनुमति देती है, जिससे व्यापार में आसानी होती है और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है ।  

आंकड़े और उपलब्धियाँ

ई-नाम प्लेटफॉर्म ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली आंकड़े दर्ज किए हैं, जो E Mandi MP पहल की सफलता को रेखांकित करते हैं:

  • मंडियों का एकीकरण: नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कुल 1473 मंडियां ई-नाम प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं ।  
  • किसान और व्यापारी पंजीकरण: 31 मार्च 2023 तक, 1.75 करोड़ से अधिक किसानों और 2.43 लाख व्यापारियों ने ई-नाम पोर्टल पर पंजीकरण कराया है ।  
  • FPO का जुड़ाव: लगभग 2,575 किसान उत्पादक संगठन (FPOs) ई-नाम पोर्टल पर ऑनबोर्ड किए गए हैं ।  
  • व्यापार मूल्य: ई-नाम पोर्टल पर लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपये का व्यापार मूल्य दर्ज किया गया है ।  

मध्य प्रदेश के संदर्भ में:

  • वर्तमान में क्रियाशील मंडियां: E Mandi MP योजना वर्तमान में मध्य प्रदेश की 42 मंडियों में क्रियाशील है ।  
  • विस्तार योजना: 1 जनवरी 2025 से 41 नई बी-श्रेणी की मंडियों में डिजिटल प्रक्रिया शुरू हो रही है ।  
  • दीर्घकालिक लक्ष्य: राज्य सरकार का लक्ष्य 1 अप्रैल 2025 तक राज्य की सभी 259 मंडियों को E Mandi MP के रूप में कार्य कराना है ।  

ये आंकड़े किसानों की आजीविका और बाजार दक्षता में ठोस सुधारों को दर्शाते हैं। उच्च कीमतें, कम लागत, और बाजार की जानकारी तक पहुंच का संयोजन सीधे किसानों के लिए बढ़ी हुई लाभप्रदता और वित्तीय स्थिरता में बदल जाता है । यह मूल्य अस्थिरता और सीमित स्थानीय खरीदारों से जुड़े जोखिमों को भी कम करता है, जिससे खेती एक अधिक व्यवहार्य और अनुमानित आजीविका बन जाती है। ये सफलताएं कृषि आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान करती हैं, जिससे भारत के कृषि क्षेत्र में एक अधिक मजबूत और लचीला भविष्य सुनिश्चित होता है।

IX. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

ई-मंडी मध्य प्रदेश क्या है?

E Mandi MP मध्य प्रदेश राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) पहल का एक राज्य-विशिष्ट कार्यान्वयन है। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो मध्य प्रदेश की कृषि उपज मंडियों को ऑनलाइन जोड़ता है, जिससे किसानों, व्यापारियों और खरीदारों को कृषि वस्तुओं का इलेक्ट्रॉनिक रूप से व्यापार करने की सुविधा मिलती है। इसका उद्देश्य कृषि विपणन में पारदर्शिता, दक्षता और उचित मूल्य खोज लाना है ।  

ई-मंडी किसानों को कैसे लाभ पहुंचाती है?

E Mandi MP किसानों को कई तरह से लाभ पहुंचाती है:

  • बेहतर मूल्य: बिचौलियों के उन्मूलन और ऑनलाइन बोली के माध्यम से बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा के कारण किसानों को औसतन 15-20% अधिक मूल्य प्राप्त होता है ।  
  • सीधी बाजार पहुँच: किसान थोक विक्रेताओं और निर्यातकों सहित खरीदारों के व्यापक स्पेक्ट्रम तक सीधे पहुँच सकते हैं, जिससे बाजार की पहुँच 50 किमी से बढ़कर 300 किमी तक हो जाती है ।  
  • कम लागत और समय की बचत: लेनदेन लागत में 25% तक की कमी आती है, और किसान प्रति लेनदेन औसतन 5-6 घंटे बचाते हैं ।  
  • पारदर्शिता: प्रवेश, नीलामी, तौल और भुगतान की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होती है, जिसमें किसानों को वास्तविक समय में अपडेट मिलते हैं ।  
  • बाजार जानकारी: किसानों को मूल्य रुझान और मांग पूर्वानुमान जैसी मूल्यवान बाजार जानकारी तक पहुँच मिलती है, जिससे वे सूचित निर्णय ले सकते हैं ।  

किसानों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया क्या है?

किसानों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में ई-नाम वेबसाइट पर जाना, “किसान” के रूप में पंजीकरण प्रकार का चयन करना, अपनी APMC चुनना, ईमेल आईडी प्रदान करना, अस्थायी क्रेडेंशियल प्राप्त करना, डैशबोर्ड में लॉगिन करना, केवाईसी पूरा करना और विवरण अपडेट करना, और अंत में APMC अनुमोदन के बाद स्थायी लॉगिन आईडी प्राप्त करना शामिल है ।  

ई-मंडी ऐप की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

E Mandi MP ऐप कई महत्वपूर्ण विशेषताएं प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • घर से प्रवेश पर्ची बनाना और क्यूआर कोड के माध्यम से प्रिंट प्राप्त करना ।  
  • किसान, प्रवेश द्वार ऑपरेटर, नीलामीकर्ता, तुलैया, मंडी सचिव और व्यापारी के लिए भूमिका-आधारित लॉगिन ।  
  • व्यापारियों के लिए भुगतान पत्रक बनाना और किसानों को मोबाइल पर भुगतान विवरण प्राप्त होना ।  
  • सुरक्षित लेनदेन के लिए 2-कारक प्रमाणीकरण ।  
  • वास्तविक समय ऑनलाइन रिकॉर्ड और एसएमएस/व्हाट्सएप अपडेट ।  
  • ऐप में इंटरनेट चेकर और रिपोर्ट में खोज विकल्प जैसी सुविधाएँ ।  

ई-मंडी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

ई-मंडी को डिजिटल साक्षरता की कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के मुद्दे, मंडी स्तरों पर कर्मचारियों की कमी, और किसानों के लिए नई तकनीकी प्रणालियों के अनुकूल होने में लगने वाले समय जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है ।  

ई-मंडी पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित करती है?

ई-मंडी प्रवेश से लेकर नीलामी, तौल और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज़ करके पारदर्शिता सुनिश्चित करती है । किसानों को अपनी उपज की बिक्री का वास्तविक समय ऑनलाइन रिकॉर्ड मिलता है, और उन्हें एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से जानकारी प्राप्त होती है कि उनकी उपज किस व्यापारी ने कितने दाम पर खरीदी है । यह मैन्युअल हेरफेर की संभावना को समाप्त करता है।  

मध्य प्रदेश में ई-मंडी के लिए भविष्य के लक्ष्य क्या हैं?

मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य 1 अप्रैल 2025 तक राज्य की सभी 259 कृषि मंडियों को ई-मंडी के रूप में कार्य कराना है । 1 जनवरी 2025 से 41 नई बी-श्रेणी की मंडियों में डिजिटल प्रक्रिया शुरू हो रही है, जो इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है ।  

ई-मंडी का उपयोग करने के लिए कोई शुल्क हैं?

ई-मंडी प्लेटफॉर्म कृषि उपज मंडी समिति (APMC) के नियमों के तहत काम करता है। इसमें अधिसूचित फसलों पर 1.5% मंडी सेस और 0.20% निराश्रित सेस लागू होता है । मध्य प्रदेश में ई-ट्रेड के माध्यम से भाग लेने वाले व्यापारियों के लिए मंडी शुल्क में 0.5% की छूट भी प्रदान की जाती है ।  

ई-मंडी में भुगतान कैसे संभाला जाता है?

ई-नाम प्लेटफॉर्म ऑनलाइन भुगतान का समर्थन करता है। किसानों के पास नकद में आंशिक भुगतान (राज्य-निर्धारित सीमा के भीतर) और शेष राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त करने का विकल्प होता है । ई-भुगतान के लिए मंडी शुल्क पर छूट भी लागू होती है । PAY2CORP जैसे अतिरिक्त भुगतान गेटवे और ICICI बैंक द्वारा व्यापारियों के लिए विशेष चालू खाता सुविधाएं भी उपलब्ध हैं ।  

X. निष्कर्ष

E Mandi MP मध्य प्रदेश कृषि विपणन के क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी पहल का प्रतिनिधित्व करती है, जो किसानों को सशक्त बनाने और पारंपरिक मंडियों से जुड़ी पुरानी चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाती है। यह केवल एक डिजिटल अपग्रेड से कहीं अधिक है; यह एक मौलिक सुधार है जो कृषि व्यापार के लिए एक अधिक पारदर्शी, कुशल और किसान-केंद्रित पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का प्रयास करता है।

इस प्रणाली ने किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति, बिचौलियों की भूमिका में कमी, लेनदेन लागत में महत्वपूर्ण बचत, और बाजार की जानकारी तक व्यापक पहुंच जैसे ठोस लाभ प्रदान किए हैं। मोबाइल ऐप और कंप्यूटरीकृत प्रक्रियाओं के माध्यम से, प्रवेश से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया सुव्यवस्थित और जवाबदेह हो गई है, जिससे किसानों के लिए समय और प्रयास की बचत हुई है। मध्य प्रदेश में 42 मंडियों में इसका सफल संचालन और 1 अप्रैल 2025 तक सभी 259 मंडियों तक विस्तार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य राज्य सरकार की डिजिटल कृषि के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

हालांकि, डिजिटल साक्षरता की कमी, ग्रामीण इंटरनेट कनेक्टिविटी और पर्याप्त स्टाफिंग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास, जिसमें व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है, यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि ई-मंडी के लाभ सभी किसानों तक समान रूप से पहुंचें, जिससे एक डिजिटल विभाजन को रोका जा सके।

कुल मिलाकर, ई-मंडी मध्य प्रदेश भारत के कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करता है, बल्कि एक अधिक गतिशील, प्रतिस्पर्धी और लचीला कृषि बाजार भी बनाता है। जैसे-जैसे यह पहल अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचती है, यह ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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